This major exhibition will be the
first to comprehensively explore the
rich and varied culture of royal
India. The exhibition will open in
the 18th century, as the power of
the Mughal Empire began to wane,
and will close in the mid 20th
century when the Princes ceded
their territories into the modern
states of India and Pakistan.

The exhibition will feature objects selected
from both royal and private collections,
including magnificent turban-jewels,
gem-encrusted weapons, beautiful textiles
and costumes, a silver howdah from Jodhpur
and textile throne from Udaipur, special commissions by Cartier and Van Cleef &
Arpels, intimate portraits by Man Ray and
Cecil Beaton, rare archive film and a Rolls Royce.

These objects reveal the many aspects of
royal life and will provide a fascinating
insight into the culture of kingship in India.

यह सबसे प्रथम मुख्य प्रदर्शनी है जो राजसी भारत की बहुमूल्य एवं विविध संस्कृति का व्यापक रूप से अंवेषण करेगी| यह प्रदर्शनी, 18वीं सदी से आरंभ होगी जब मुगल साम्राज्य की शक्ति कम होने लगी| यह प्रदर्शनी मध्य 20 वी सदी में समाप्त होगी जब रजवाड़ों नें भारत एवं पाकिस्तान के नए राष्ट्रों को अपने क्षेत्र सौंप दिए|

इस प्रदर्शनी में, राजसी एवं निजी संग्रहण से वस्तुओं को चुन कर प्रदर्शित किया जाएगा| इसमें शानदार पगड़ी के रत्न, रत्न से जड़े हुए शस्त्र, सुन्दर कपड़े एवं पोशाक, जोधपुर से एक चांदी का बना हुआ हौदा एवं उदयपुर से कपड़ों से बना हुआ राजसिंहासन शामिल होंगे| साथ ही, कारटीयर और वैन क्लीफ एवं आर्पेल को विशेष कार्यभार दे कर बनाई गई चीजों को भी शामिल किया जाएगा| मे रे एवं सिसिल बीटन के द्वारा बनाई गई निजी तस्वीरें, दुर्लभ संग्रहित फिल्म एवं एक रोल्ज रॉइस भी प्रदर्शित किए जाएंगे| यह चीजें, राजकीय जीवन के कई पहलुओं का खुलासा करती हैं| यह सारी चीजें, भारत में राजत्व की संस्कृति की एक दिलचस्प अंतर्दृष्टि प्रदान करेंगे|