Kingships In India

In India rulers were expected to exercise rajadharma, meaning the duties and behaviour appropriate to a king. These would include the protection of their subjects, the adjudication of disputes, and the ministering of justice and punishment. Martial skills were as important as administrative and diplomatic ones; as well as being wise and benevolent, kings were expected to be fierce warriors and skilled hunters. Rajadharma was also exercised through the patronage of poets, musicians, architects, artists, craftsmen and religious foundations.

The concept of rajadharma derived from ancient texts and evolved in response to foreign invasion as well as to religious, social and cultural changes. By the 18th century the Mughals had created a dominant notion of kingship that united indigenous models with those derived from Islamic culture.

भारत में राजत्व

भारत में, शासकों से प्रत्याशा की जाती थी कि वे राजधर्म का पालन करेंगे| जिसका मतलब था, ऐसे दायित्व या व्यवहार जो एक राजा के लिए उपयुक्त थे| इनमें शामिल थे, अपनी प्रजा की रक्षा करना, विवादों का न्याय निर्णय, न्याय और दंड देना| सामरिक कौशल को प्रशासनिक एवं राजनयिक कौशल के जितना ही जरूरी माना जाता था; ज्ञानी एवं परोपकारी होने के साथ-साथ, राजाओं से यह प्रत्याशा की जाती थी कि वे प्रबल योद्धा एवं निपुण शिकारी होंगे| कवियों, वादकों, निर्माणकर्ताओं, कलाकार, शिल्पकार एवं धार्मिक संस्थापना को अपना प्रश्रय देकर भी राजधर्म का पालन किया जाता था|

राजधर्म की धारण, पौराणिक पाठों से ली गयी है| विदेशी आक्रमण एवं धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक बदलावों के प्रति उत्पन्न होने वाली प्रतिक्रिया के माध्यम से भी इसका विकास हुआ| 18वीं सदी तक मुगलों ने राजत्व की एक प्रमुख धारणा की रचना कर ली थी| यह धारणा, देशी नमूने के साथ इस्लामी संस्कृति से ली गयी धारणाओं को जोड़ती थी|