Royal Spectacle

The secular and sacred power of an Indian king was expressed most spectacularly in the grand public processions that celebrated royal events and religious festivities. Riding a richly caparisoned elephant or horse, the ruler was lavishly dressed and jewelled and surrounded by attendants bearing symbolic attributes of kingship: a royal parasol, chauri, fans and staffs of authority.

The vision of a king in all his splendour was believed to be auspicious. It was central to the concept of darshan, the propitious act of seeing and being seen by a superior being, whether a god or a king. Although originally a Hindu notion, the idea of darshan became an integral aspect of kingship throughout the subcontinent.

राजकीय नजारा

भारतीय राजा के लौकिक एवं पवित्र शक्ति को सबसे शानदार तरीके से, उन भव्य सार्वजनिक शोभायात्राओं में प्रदर्शित किया जाता था जो राजकीय घटनाओं एवं धार्मिक उत्सवों को मनाने के लिए आयोजित की जाती थीं| एक पूर्ण रूप से सुसज्जित हाथी या घोड़े पर सवार राजा, शानदार कपड़ों और आभूषणों में सजा हुआ होता था| उसके चारों ओर राजत्व के प्रतीकों को पकड़े हुए सेवक रहते थे| इनमें: एक राजकीय छत्री,चौरी, पंखें एवं अधिकार की छड़ी शामिल थे|

राजा को उसके शानसके शानदार रूप में देखना शुभ माना जाता था| यह दर्शन की धारणा का केन्द्र था| एक अधिक श्रेष्ठ व्यक्ति को देखना एवं उसके द्वारा देखे जाने का शुभ कार्य, चाहे वह भगवान हो या राजा| यद्यपि, मूल रूप से यह एक हिन्दू धारणा थी| फिर भी, दर्शन की धारणा पूरे उपमहाद्वीप में राजत्व का एक अनिवार्य पहलू बन गयी|