Exhibition Highlights

The word maharaja, literally ‘great king’, conjures up a vision of splendour and magnificence. The image of a turbaned, bejewelled ruler with absolute authority and immense wealth is pervasive and evocative, but it fails to do justice to his role in the cultural and political history of India. Maharaja: the splendour of India’s royal courts re-examines the world of the maharajas and their extraordinarily rich culture.

The exhibition spans the period from the beginning of the 18th century to the mid-20th century, bringing together over 250 magnificent objects, many being lent from India’s royal collections for the first time. It examines the changing role of the maharajas within a social and historical context and reveals how their patronage of the arts, both in India and Europe, resulted in splendid and beautiful objects symbolic of royal status, power and identity.

प्रदर्शनी

महाराजा शब्द, वस्तुतः ‘’महान राजा’, शान-शौकत एवं वैभव की छवि पेश करता है| पगड़ी पहने हुए एक रत्नजड़ित राजा की छवि जिसके पास पूर्ण प्राधिकार और अपरिमित दौलत है| वह व्यापक और उद्बोधक है परंतु वह भारत के सांस्कृतिक एवं राजनीतिक इतिहास में अपनी भूमिका को सही तरह से निभाने में असफल रहा| महाराजा: द स्प्लेनडर ऑफ इनडियाज रॉयल कोर्ट्स, महाराजाओं की दुनिया और उनके विशेष बहुमूल्य संस्कृति का पुनः परीक्षण करती है|

इस प्रदर्शनी में 18वीं सदी के आरंभ से लेकर मध्य-बीसवीं सदी तक की समय अवधि शामिल है| इसमें 250 से अधिक शानदार चीजें प्रदर्शित की जाएंगी| इनमें से बहुत सारी चीजों को भारत के राजकीय संग्रहों से प्रथम बार उधार लिया जा रहा है| यह, सामाजिक एवं ऐतिहासिक संदर्भ में महाराजाओं की बदलती हुई भूमिका का परीक्षण करती है| यह प्रदर्शनी दिखाती है कि भारत एवं यूरोप, दोनों में इनके द्वारा कला को दिए गए प्रश्रय ने किस प्रकार बहुत ही बढ़िया एवं सुन्दर चीजों की रचना की जो शाही ओहदे, सत्ता और पहचान के प्रतीक थे|